वाल्मीकि रामायण 6.106.1
स तु मोहात् सुसङ्क्रुद्धः कृतान्तबलचोदितः ।क्रोधसंरक्तनयनो रावणः सूतमब्रवीत्॥
sa tu mohāt susaṅkruddhaḥ kṛtāntabalacoditaḥ |krodhasaṃraktanayano rāvaṇaḥ sūtamabravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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