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वाल्मीकि रामायण 6.106.22
न मया स्वेच्छया वीर रथो ऽयमपवाहितः॥
na mayā svecchayā vīra ratho 'yamapavāhitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंन मया स्वेच्छया वीर रथो ऽयमपवाहितः॥
na mayā svecchayā vīra ratho 'yamapavāhitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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