वाल्मीकि रामायण 6.106.27
एवमुक्त्वा ततस्तुष्टो रावणो राक्षसेश्वरः ।ददौ तस्मै शुभं ह्येकं हस्ताभरणमुत्तमम्॥
evamuktvā tatastuṣṭo rāvaṇo rākṣaseśvaraḥ |dadau tasmai śubhaṃ hyekaṃ hastābharaṇamuttamam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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