वाल्मीकि रामायण 6.106.9
निवर्तय रथं शीघ्रं यावन्नोपैति मे रिपुः ।यदि वा ऽध्युषितो वा ऽसि स्मर्यन्ते यदि वा गुणाः॥
nivartaya rathaṃ śīghraṃ yāvannopaiti me ripuḥ |yadi vā 'dhyuṣito vā 'si smaryante yadi vā guṇāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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