वाल्मीकि रामायण 6.107.10
आदित्यः सविता सूर्यः खगः पूषा गभस्तिमान् ।सुवर्णसदृशो भानुर्हिरण्यरेता दिवाकरः॥
ādityaḥ savitā sūryaḥ khagaḥ pūṣā gabhastimān |suvarṇasadṛśo bhānurhiraṇyaretā divākaraḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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