वाल्मीकि रामायण 6.107.11
हरिदश्वः सहस्रार्चिः सप्तसप्तिर्मरीचिमान् ।तिमिरोन्मथनः शम्भुस्त्वष्टा मार्तण्ड अंशुमान्॥
haridaśvaḥ sahasrārciḥ saptasaptirmarīcimān |timironmathanaḥ śambhustvaṣṭā mārtaṇḍa aṃśumān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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