वाल्मीकि रामायण 6.107.12
हिरण्यगर्भः शिशिरस्तपनो भास्करो रविः ।अग्निगर्भो ऽदितेः पुत्रः शङ्खः शिशिरनाशनः॥
hiraṇyagarbhaḥ śiśirastapano bhāskaro raviḥ |agnigarbho 'diteḥ putraḥ śaṅkhaḥ śiśiranāśanaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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