वाल्मीकि रामायण 6.107.19
ब्रह्मोशानाच्युतेशाय सूर्यायादित्यवर्चसे ।भास्वते सर्वभक्षाय रौद्राय वपुषे नमः॥
brahmośānācyuteśāya sūryāyādityavarcase |bhāsvate sarvabhakṣāya raudrāya vapuṣe namaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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