वाल्मीकि रामायण 6.107.26
पूजयस्वैनमेकाग्रो देवदेवं जगत्पतिम् ।एतत्रिगुणितं जप्त्वा युद्धेषु विजयिष्यसि॥
pūjayasvainamekāgro devadevaṃ jagatpatim |etatriguṇitaṃ japtvā yuddheṣu vijayiṣyasi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें