वाल्मीकि रामायण 6.107.27
अस्मिन् क्षणे महाबाहो रावणं त्वं वधिष्यसि ।एवमुक्त्वा तदा ऽगस्त्यो जगाम च यथागतम्॥
asmin kṣaṇe mahābāho rāvaṇaṃ tvaṃ vadhiṣyasi |evamuktvā tadā 'gastyo jagāma ca yathāgatam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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