वाल्मीकि रामायण 6.108.1
स रथं सारथिर्हृष्टः परसैन्यप्रधर्षणम् ।गन्धर्वनगराकारं समुच्छ्रितपताकिनम्॥
sa rathaṃ sārathirhṛṣṭaḥ parasainyapradharṣaṇam |gandharvanagarākāraṃ samucchritapatākinam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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