वाल्मीकि रामायण 6.108.29
दिशश्च प्रदिशः सर्वा बभूवुस्तिमिरावृताः ।पांसुवर्षेण महता दुर्दर्शं च नभो ऽभवत्॥
diśaśca pradiśaḥ sarvā babhūvustimirāvṛtāḥ |pāṃsuvarṣeṇa mahatā durdarśaṃ ca nabho 'bhavat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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