वाल्मीकि रामायण 6.108.30
कुर्वन्त्यः कलहं घोरं शारिकास्तद्रथं प्रति ।निपेतुः शतशस्तत्र दारुणं दारुणारुताः॥
kurvantyaḥ kalahaṃ ghoraṃ śārikāstadrathaṃ prati |nipetuḥ śataśastatra dāruṇaṃ dāruṇārutāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें