वाल्मीकि रामायण 6.108.9
यथा ऽ ऽपसव्यं पतता वेगेन महता पुनः ।समरे हन्तुमात्मानं तथा तेन कृता मतिः॥
yathā ' 'pasavyaṃ patatā vegena mahatā punaḥ |samare hantumātmānaṃ tathā tena kṛtā matiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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