वाल्मीकि रामायण 6.112.14
वदन्तं हेतुमद्वाक्यं परिमृष्टार्थनिश्चयम् ।रामः शोकसमाविष्टमित्युवाच विभीषणम्॥
vadantaṃ hetumadvākyaṃ parimṛṣṭārthaniścayam |rāmaḥ śokasamāviṣṭamityuvāca vibhīṣaṇam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें