वाल्मीकि रामायण 6.116.15
एवमुक्ता समुत्पत्य सीता शशिनिभानना ।प्रहर्षेणावरुद्धा सा व्याजहार न किञ्चन॥
evamuktā samutpatya sītā śaśinibhānanā |praharṣeṇāvaruddhā sā vyājahāra na kiñcana ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें