वाल्मीकि रामायण 6.116.16
अब्रवीच्च हरिश्रेष्ठः सीतामप्रतिजल्पतीम् ।किं नु चिन्तयसे देवि किं नु मां नाभिभाषसे॥
abravīcca hariśreṣṭhaḥ sītāmapratijalpatīm |kiṃ nu cintayase devi kiṃ nu māṃ nābhibhāṣase ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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