वाल्मीकि रामायण 6.116.17
एवमुक्ता हनुमता सीता धर्मे व्यवस्थिता ।अब्रवीत् परमप्रीता हर्षगद्गदया गिरा॥
evamuktā hanumatā sītā dharme vyavasthitā |abravīt paramaprītā harṣagadgadayā girā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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