वाल्मीकि रामायण 6.116.19
न हि पश्यामि सदृशं चिन्तयन्ती प्लवङ्गम ।मत्प्रियाख्यानाकस्येह तव प्रत्यभिनन्दनम्॥
na hi paśyāmi sadṛśaṃ cintayantī plavaṅgama |matpriyākhyānākasyeha tava pratyabhinandanam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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