वाल्मीकि रामायण 6.116.25
अर्थतश्च मया प्राप्ता देवराज्यादयो गुणाः ।हतशत्रुं विजयिनं रामं पश्यामि सुस्थितम्॥
arthataśca mayā prāptā devarājyādayo guṇāḥ |hataśatruṃ vijayinaṃ rāmaṃ paśyāmi susthitam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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