वाल्मीकि रामायण 6.116.31
इमास्तु खलु राक्षस्यो यदि त्वमनुमन्यसे ।हन्तुमिच्छाम्यहं सर्वा याभिस्त्वं तर्जिता पुरा॥
imāstu khalu rākṣasyo yadi tvamanumanyase |hantumicchāmyahaṃ sarvā yābhistvaṃ tarjitā purā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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