वाल्मीकि रामायण 6.116.36
एवंप्रकारैर्बहुभिर्विप्रकारैर्यशस्विनि ।हन्तुमिच्छाम्यहं देवि तवेमाः कृतकिल्बिषाः॥
evaṃprakārairbahubhirviprakārairyaśasvini |hantumicchāmyahaṃ devi tavemāḥ kṛtakilbiṣāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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