वाल्मीकि रामायण 6.116.40
प्राप्तव्यं तु दशायोगान्मयैतदिति निश्चितम् ।दासीनां रावणस्याहं मर्षयामीह दुर्बला॥
prāptavyaṃ tu daśāyogānmayaitaditi niścitam |dāsīnāṃ rāvaṇasyāhaṃ marṣayāmīha durbalā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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