वाल्मीकि रामायण 6.116.41
आज्ञप्ता रावणेनैता राक्षस्यो मामतर्जयन् ।हते तस्मिन्न कुर्युर्हि तर्जनं वानरोत्तम॥
ājñaptā rāvaṇenaitā rākṣasyo māmatarjayan |hate tasminna kuryurhi tarjanaṃ vānarottama ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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