वाल्मीकि रामायण 6.116.45
लोकहिंसाविहाराणां रक्षसां कामरूपिणाम् ।कुर्वतामपि पापानि नैव कार्यमशोभनम्॥
lokahiṃsāvihārāṇāṃ rakṣasāṃ kāmarūpiṇām |kurvatāmapi pāpāni naiva kāryamaśobhanam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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