वाल्मीकि रामायण 6.116.50
पूर्णचन्द्राननं रामं द्रक्ष्यस्यार्ये सलक्ष्मणम् ।स्थिरमित्रं हतामित्रं शचीव त्रिदशेश्वरम्॥
pūrṇacandrānanaṃ rāmaṃ drakṣyasyārye salakṣmaṇam |sthiramitraṃ hatāmitraṃ śacīva tridaśeśvaram ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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