वाल्मीकि रामायण 6.116.5
सौम्यं दृष्ट्वा मुखं तस्या हनुमान् प्लवगोत्तमः ।रामस्य वचनं सर्वमाख्यातुमुपचक्रमे॥
saumyaṃ dṛṣṭvā mukhaṃ tasyā hanumān plavagottamaḥ |rāmasya vacanaṃ sarvamākhyātumupacakrame ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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