वाल्मीकि रामायण 6.117.16
तामागतामुपश्रुत्य रक्षोगृहचिरोषिताम् ।हर्षो दैन्यं च रोषश्च त्रयं राघवमाविशत्॥
tāmāgatāmupaśrutya rakṣogṛhaciroṣitām |harṣo dainyaṃ ca roṣaśca trayaṃ rāghavamāviśat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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