वाल्मीकि रामायण 6.117.17
ततः पार्श्वगतं दृष्ट्वा सविमर्शं विचारयन् ।विभीषणमिदं वाक्यमहृष्टं राघवो ऽब्रवीत्॥
tataḥ pārśvagataṃ dṛṣṭvā savimarśaṃ vicārayan |vibhīṣaṇamidaṃ vākyamahṛṣṭaṃ rāghavo 'bravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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