वाल्मीकि रामायण 6.117.23
उत्सार्यमाणांस्तान् दृष्ट्वा समन्ताज्जातसम्भ्रमान् ।दाक्षिण्यात्तदमर्षाच्च वारयामास राघवः॥
utsāryamāṇāṃstān dṛṣṭvā samantājjātasambhramān |dākṣiṇyāttadamarṣācca vārayāmāsa rāghavaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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