वाल्मीकि रामायण 6.117.25
किमर्थं मामनादृत्य क्लिश्यते ऽयं त्वया जनः ।निवर्तयैनमुद्योगं जनो ऽयं स्वजनो मम॥
kimarthaṃ māmanādṛtya kliśyate 'yaṃ tvayā janaḥ |nivartayainamudyogaṃ jano 'yaṃ svajano mama ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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