वाल्मीकि रामायण 6.117.26
न गृहाणि न वस्त्राणि न प्राकारास्तिरस्क्रियाः ।नेदृशा राजसत्कारा वृत्तमावरणं स्त्रियाः॥
na gṛhāṇi na vastrāṇi na prākārāstiraskriyāḥ |nedṛśā rājasatkārā vṛttamāvaraṇaṃ striyāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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