वाल्मीकि रामायण 6.117.28
सैषा युद्धगता चैव कृच्छ्रे च महति स्थिता ।दर्शने ऽस्या न दोषः स्यान्मत्समीपे विशेषतः॥
saiṣā yuddhagatā caiva kṛcchre ca mahati sthitā |darśane 'syā na doṣaḥ syānmatsamīpe viśeṣataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें