वाल्मीकि रामायण 6.117.30
एवमुक्तस्तु रामेण सविमर्शो विभीषणः ।रामस्योपानयत् सीतां सन्निकर्षं विनीतवत्॥
evamuktastu rāmeṇa savimarśo vibhīṣaṇaḥ |rāmasyopānayat sītāṃ sannikarṣaṃ vinītavat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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