वाल्मीकि रामायण 6.117.36
अथ समपनुदन्मनःक्लमं सा सुचिरमदृष्टमुदीक्ष्य वै प्रियस्य ।वदनमुदितपूर्णचन्द्रकान्तं विमलशशाङ्कनिभानना तदानीम्॥
atha samapanudanmanaḥklamaṃ sā suciramadṛṣṭamudīkṣya vai priyasya |vadanamuditapūrṇacandrakāntaṃ vimalaśaśāṅkanibhānanā tadānīm ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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