वाल्मीकि रामायण 6.117.37
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये श्रीमद्युद्धकाण्डे सप्तदशोत्तरशततमः सर्गः॥
ityārṣe śrīmadrāmāyaṇe vālmīkīye ādikāvye śrīmadyuddhakāṇḍe saptadaśottaraśatatamaḥ sargaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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