वाल्मीकि रामायण 6.118.10
इत्येवं ब्रुवतस्तस्य सीता रामस्य तद्वचः ।मृगीवोत्फुल्लनयना बभूवाश्रुपरिप्लुता॥
ityevaṃ bruvatastasya sītā rāmasya tadvacaḥ |mṛgīvotphullanayanā babhūvāśrupariplutā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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