वाल्मीकि रामायण 6.118.12
स बद्ध्वा भ्रुकुटीं वक्त्रे तिर्यक्प्रेक्षितलोचनः ।अब्रवीत् परुषं सीतां मध्ये वानररक्षसाम्॥
sa baddhvā bhrukuṭīṃ vaktre tiryakprekṣitalocanaḥ |abravīt paruṣaṃ sītāṃ madhye vānararakṣasām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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