वाल्मीकि रामायण 6.118.15
विदितश्चास्तु ते भद्रे यो ऽयं रणपरिश्रमः ।स तीर्णः सुहृदां वीर्यान्न त्वदर्थं मया कृतः॥
viditaścāstu te bhadre yo 'yaṃ raṇapariśramaḥ |sa tīrṇaḥ suhṛdāṃ vīryānna tvadarthaṃ mayā kṛtaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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