वाल्मीकि रामायण 6.118.26
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये श्रीमद्युद्धकाण्डे अष्टादशोत्तरशततमः सर्गः॥
ityārṣe śrīmadrāmāyaṇe vālmīkīye ādikāvye śrīmadyuddhakāṇḍe aṣṭādaśottaraśatatamaḥ sargaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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