वाल्मीकि रामायण 6.120.12
आत्मानं मानुषं मन्ये रामं दशरथात्मजम् ।यो ऽहं यस्य यतश्चाहं भगवांस्तद् ब्रवीतु मे॥
ātmānaṃ mānuṣaṃ manye rāmaṃ daśarathātmajam |yo 'haṃ yasya yataścāhaṃ bhagavāṃstad bravītu me ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें