वाल्मीकि रामायण 6.120.18
इन्द्रकर्मा महेन्द्रस्त्वं पद्मनाभो रणान्तकृत् ।शरण्यं शरणं च त्वामाहुर्दिव्या महर्षयः॥
indrakarmā mahendrastvaṃ padmanābho raṇāntakṛt |śaraṇyaṃ śaraṇaṃ ca tvāmāhurdivyā maharṣayaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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