वाल्मीकि रामायण 6.120.23
सहस्रचरणः श्रीमान् शतशीर्षः सहस्रदृक् ।त्वं धारयसि भूतानि वसुधां च सपर्वताम्॥
sahasracaraṇaḥ śrīmān śataśīrṣaḥ sahasradṛk |tvaṃ dhārayasi bhūtāni vasudhāṃ ca saparvatām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें