वाल्मीकि रामायण 6.120.24
अन्ते पृथिव्याः सलिले दृश्यसे त्वं महोरगः ।त्रील्लोँकान् धारयन् राम देवगन्धर्वदानवान्॥
ante pṛthivyāḥ salile dṛśyase tvaṃ mahoragaḥ |trīllom̐kān dhārayan rāma devagandharvadānavān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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