वाल्मीकि रामायण 6.120.25
अहं ते हृदयं राम जिह्वा देवी सरस्वती ।देवा गात्रेषु रोमाणि निर्मिता ब्रह्मणः प्रभो॥
ahaṃ te hṛdayaṃ rāma jihvā devī sarasvatī |devā gātreṣu romāṇi nirmitā brahmaṇaḥ prabho ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें