वाल्मीकि रामायण 6.120.4
एते सर्वे समागम्य विमानैः सूर्यसन्निभैः ।आगम्य नगरीं लङ्कामभिजग्मुश्च राघवम्॥
ete sarve samāgamya vimānaiḥ sūryasannibhaiḥ |āgamya nagarīṃ laṅkāmabhijagmuśca rāghavam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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