वाल्मीकि रामायण 6.122.10
दीप्यमानं स्वया लक्ष्म्या विरजोम्बरधारिणम् ।लक्ष्मणेन सह भ्रात्रा ददर्श पितरं विभुः॥
dīpyamānaṃ svayā lakṣmyā virajombaradhāriṇam |lakṣmaṇena saha bhrātrā dadarśa pitaraṃ vibhuḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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