वाल्मीकि रामायण 6.122.15
कैकेय्या यानि चोक्तानि वाक्यानि वदतां वर ।तव प्रवाजनार्थानि स्थितानि हृदये मम॥
kaikeyyā yāni coktāni vākyāni vadatāṃ vara |tava pravājanārthāni sthitāni hṛdaye mama ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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