वाल्मीकि रामायण 6.122.7
एष राजा विमानस्थः पिता दशरथस्तव ।काकुत्स्थ मानुषे लोके गुरुस्तव महायशाः॥
eṣa rājā vimānasthaḥ pitā daśarathastava |kākutstha mānuṣe loke gurustava mahāyaśāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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