वाल्मीकि रामायण 6.123.11
महानयं वरस्तात त्वयोक्तो रघुनन्दन ।द्विर्मया नोक्तपूर्वं हि तस्मादेतद्भविष्यति॥
mahānayaṃ varastāta tvayokto raghunandana |dvirmayā noktapūrvaṃ hi tasmādetadbhaviṣyati ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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